बाजे मुरलिया बाजे रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

विमुख शिखर से धारा धाये,राधा हरि सम्मुख लाये,

बाँसुरिया हरि साँवरिया की राधा गोरी सुनवा ले,

बाजे रे मुरलिया बाजे रे,

अधर धरे मोहन मुरली पर,

होंठ पे माया बिराजे,

हरे-हरे बाँस की बनी मुरलिया,

मरम मरम को छुए अंगुरिया,

चंचल चतुर अंगुरिया जिस पर,

कनक मुंदरिया साजे,

बाजे रे मुरलिया बाजे ...

पीली मुंदरी अंगुरी शाम,

मुंदरी पर राधा का नाम,

आकर देखे सुने मधुर स्वर,

राधा गोरी लाजे,

बाजे रे मुरलिया बाजे ...

भूल गई राधा भरी गगरिया,

भूल करे गोधन को साँवरिया,

जाने न जाने तेरो (?) जाने,

जाने अध जग राजे,

बाजे मुरलिया बाजे,

बाजे रे मुरलिया बाजे ..

सुरेश कुमार खोड़ा झोटवाड़ा जयपुर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।