वो बाप ही होता है

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॥ पावन पाठ ॥

परिवार का बोझा जो , कंधो पे ढोता है ,

कोई और नहीं प्यारे , वो बाप ही होता है,

परिवार की खातिर वो , जब घर से निकलता है,

पैरों के तले अपने , अरमान कुचलता है,

हालात से जो अक्सर , करता समझौता है,

कोई और नहीं प्यारे ..

गंभीर दिखाई दे , बेटे की पढ़ाई पे ,

पत्थर दिल भी पिघले , बेटी की विदाई पे ,

इक कोने में जाकर , वो फुट के रोता है ,

कोई और नहीं प्यारे ..

दुनिया में पिता से ही , पहचान मिली हमको,

सूरज सी चमकती जो , वो शान मिली हमको,

सम्मान की माला में , प्रतिभा को पिरोता है ,

कोई और नहीं प्यारे ..

हर दुख हर चिंता को , हंस करके वो झेले ,

बच्चों पे मुसीबत हो , वो मौत से जा खेले ,

मेहनत के पसीने से , " नरसी " दुख धोता है,

कोई और नहीं प्यारे ..

लेखक एवं गायक : नरेश " नरसी " ( फतेहाबाद )

की ओर से आप सभी को .. !! जय श्री श्याम जी !!

भजन प्रेषक : प्रदीप सिंघल ( जीन्द वाले )

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।