भव सागर पड़ी मेरी नैया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

भव सागर पड़ी मेरी नैया, अब आजा रे मेरे कन्हैया,

कहीं डूब न जाऊँ मझधार में, मेरी नैया का बन जा खिवैया,

भव सागर पड़ी मेरी नैया, अब आजा रे मेरे कन्हैया,

कहीं डूब न जाऊँ मझधार में, मेरी नैया का बन जा खिवैया,

बीच सभा में जब द्रोपदी ने, तुमको टेर लगाईं थी,

प्रेम के बंधन मैं बंध कर तूने, बहन की लाज बचाई थी,

जब द्रोपदी ने तुझको पुकारा, आया बहना का बनके तू भैया,

कहीं डूब न जाऊँ मझधार में, मेरी नैया का बन जा खिवैया,

भव सागर पड़ी मेरी नैया, अब आजा रे मेरे कन्हैया,

कहीं डूब न जाऊँ मझधार में, मेरी नैया का बन जा खिवैया,

सखा सुदामा से सांवरिया, तूने निभाई थी यारी,

मीरा के विष के प्याले को, अमृत कर दिया बनवारी,

नानी नरसी ने तुझको पुकारा, आया आया तू बंसी बजैया,

कहीं डूब न जाऊँ मझधार में, मेरी नैया का बन जा खिवैया,

भव सागर पड़ी मेरी नैया, अब आजा रे मेरे कन्हैया,

कहीं डूब न जाऊँ मझधार में, मेरी नैया का बन जा खिवैया,

जरा सामने तो आ सावंरिया, छुप छुप चलने में क्या राज़ है,

यूँ छुप न सकेगा तू मोहन, मेरी आत्मा की ये आवाज़ है,

सौरभ मधुकर हमने सुना है, भगत बिना भगवान नहीं,

भावना के भूखे है भगवन, कहते वेद पुराण यही,

आजा मैंने भी तुझको पुकारा, आ के थाम ले मेरी तू बैंया,

कहीं डूब न जाऊँ मझधार में, मेरी नैया का बन जा खिवैया,

भव सागर पड़ी मेरी नैया, अब आजा रे मेरे कन्हैया,

कहीं डूब न जाऊँ मझधार में, मेरी नैया का बन जा खिवैया,

मेरी नैया का बन जा खिवैया..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।