दर तुम्हारा मिला हर ख़ुशी मिल गयी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दर तुम्हारा मिला हर ख़ुशी मिल गयी

अब ज़माने की खुशियां मिले ना मिले

आपके प्यार की इतनी दौलत मिली

अब ज़माने की दौलत मिले ना मिले

ना भुल पाऊँ मैं

दुनियां ने जब सताया था

तुम्हीं ने सांवरे मुझको

गले लगाया था

भरोसा टूट गया

मतलबी ज़माने से

शरण में आपके

मैंने ठिकाना पाया था

ठिकाना पाया था

आपका युँ सदा हाथ सिर पे रहे

फिर ज़माने की छतरी मिले ना मिले

दर तुम्हारा मिला हर ख़ुशी मिल गयी

अब ज़माने की खुशियां मिले ना मिले

ह्रदय में सांवरे

तुम को ही अब बसाया है

तुम्हारे प्यार में

मैंने जहां भुलाया है

नहीं उम्मीद है दुनियां

के ठेकेदारों से

तेरी चौखट पे आके

ये तो सर झुकाया है

सर झुकाया है

भूलकर भी कभी ना भुलाना हमें

साथ जालिम जहां का मिले ना मिले

दर तुम्हारा मिला हर ख़ुशी मिल गयी

अब ज़माने की खुशियां मिले ना मिले

तुम्हीं हो सांस में

तुम्हीं हो मेरी धड़कन में

ना कोई और आ सकेगा

मेरे जीवन में

है इतनी आरज़ू

इतना तो बाबा कर देना

ये मेरे प्राण भी निकले

तो तेरे आँगन में

आखरी वक़्त में

सामने तू रहे

हर्ष को फिर वो

लम्हा मिले ना मिले

दर तुम्हारा मिला हर ख़ुशी मिल गयी

अब ज़माने की खुशियां मिले ना मिले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।