हो के सिंह सवार माँ शेरावाली आई है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हो के सिंह सवार माँ शेरावाली आई है,

बचियाँ नु देन दिद्दार शेरवाली आई है ,

बड़े चीरा तो आज मैया ने साडी आस पुजाइ है,

हो के सिंह सवार माँ शेरावाली आई है,

सुहा सुहा चोला माँ ने गल विच पाया है,

सिर उते हीरिया दा मुकट सजाया है.

कर सोलह शृंगार माँ शेरावाली आई है,

हो के सिंह सवार माँ शेरावाली आई है,

ढोल ते नगाड़े आज जोश विच भजदे,

नच नच धरती ते पैर नहीं लगदे,

साहनु खुशियां देन अपार माँ शेरावाली आई है,

हो के सिंह सवार माँ शेरावाली आई है,

गीठ गीठ सरेया नु चढिया ने लल्लियाँ,

वेरमे ने नेमता मैया कोलो पा लिया,

गुण गावे गर्ग विशाल माँ शेरावाली आई है,.

हो के सिंह सवार माँ शेरावाली आई है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।