मेला है मेला है शेरावाली दा मेला है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चारे पासे धूम मची है खुशिया दा वेला है,

मेला है मेला है शेरावाली दा मेला है,

माँ दे प्यारे मेला वेखन आये भोली माँ दा,

रेहमत करदी माँ वैष्णो नाम बड़ा इसदा,

मेला वेखन आया हर कोई नाल गुरु दे चेला है,

मेला है मेला है शेरावाली दा मेला है,

खूब दुकाना सजिया एथे लगियाँ रोनका भरी,

नचन गावन भगत जैकारे लावन बारो बारी,

झंडे लें हुलारे होया मौसम भी अलबेला है,

मेला है मेला है शेरावाली दा मेला है,

राजू भी हरिपुरिया अम्बरसरिया हज़ारी लगावे,

मैया दा गुण गान है करदी दर ते सानिया गावे,

लंगर चलदे दिन राति ना लगे पैसा थेला है,

मेला है मेला है शेरावाली दा मेला है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।