आजो भगतो मैया दे दरबार चलिये,

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आये चाले सोहन दे अम्बे नु ध्याउन दे,

ज्योता वाली नु ध्याइये सुते भाग जगाइए ,

शेरावाली माँ दा करण दीदार चलिये

आजो भगतो मैया दे दरबार चलिये,

निगड़ा प्यार माँ दा डूबदिया नु तार दा,

ओहने वेहड़ा पार लौना सारे संसार दा,

भेद भाव नु मिटा के उच नीच नु भुला के,

लॉन सिर तो मुसीबतां दा भार चलिये,

आजो भगतो मैया दे दरबार चलिये,

जेहड़ा बंदा पापी ते हनकारी हॉवे दिल दा,

माता दा आशीर्वाद उस नु नई मिलदा,

रिजा तनो मनो लाके नाल मोतियां सजाके,

माँ छतर चढ़ोन हर बार चलिये,

आजो भगतो मैया दे दरबार चलिये,

चढ़ के पहाड़ा माँ दे मंदिर पधारिये,

ऐहडी तलवंडी दिया हिम तो न हारिये,

ओहदा करके दीदार लाइए कष्ट निवार,

गल अम्बे दे फुला दा पौन हार चलिये,

आजो भगतो मैया दे दरबार चलिये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।