माँ दिया ज्योता च वसदा रूप माई दा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ दिया ज्योता च वसदा रूप माई दा,

जगमग जगमग ज्योत जो वाला रूप निराला माई दा,

माँ दिया ज्योता च वसदा रूप माई दा,

सब तो पेहला राजे अकबर ज्योता न अजमाया,

कह के झूठा ज्योता ऊपर पानी उस ने पाया,

पानी जो जो पेंदा जावे ज्योति तो तो ऊपर आवे,

माँ दिया ज्योता च वसदा रूप माई दा,

फिर न मने राजा तविया ज्योता ऊपर पाइयाँ,

विच पला दे चीर के तविया ज्योता ऊपर आइया,

राजा भूल दी माफ़ी मंगी छत्तर चढ़ाया पैरो नंगी,

माँ दिया ज्योता च वसदा रूप माई दा,

सूरज ऊठे चमके मारे ज्योता दा लिश्कारा,

मनवीर तेरे गुण गावे तेरा भगत प्यारा,

तेरी जो भी महिमा गावे उहनूं थोड़ कोई ना आवे,

माँ दिया ज्योता च वसदा रूप माई दा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।