हुन आजा सैया वे सोह है तनु प्यार दी

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॥ पावन पाठ ॥

हुन आजा सैया वे सोह है तनु प्यार दी,

तू की जाने कैसे बीती घड़ियाँ इंतज़ार की,

हुन आजा सैया वे सोह है तनु प्यार दी,

इक दिन राति सपने दे विच आ गये बाबा साई,

सिर ते कफनी तिलक विराजे साई दी छवि निराली.

आँख जदो मैं खोली सैयां रह गई रूप निहार दी,

हुन आजा सैया वे सोह है तनु प्यार दी,

डरदी डर दी आँख न खोला किते सपना न टूट जाए,

मुश्कील दे नाल सईया आये किते जना न रह जाए,

आँख जदो मैं खोली सैयां रह गई अवाजा मारदी,

हुन आजा सैया वे सोह है तनु प्यार दी,

तू की जाने दुःख ने केहड़े फिक्र दे विच खोई,

जोगन वाला वेश बना के जोगन तेरी होइ,

चरना दे नाल ला ले सैयां रख ले हुन लाज बच्चियां दी,

हुन आजा सैया वे सोह है तनु प्यार दी,

जिस तन लगे सो तन जाने और न जाने कोई,

मैं मस्तानी प्रेम दीवानी दर्द न जाने कोई,

देवन ताने घरदे मैंनू दुनिया पाई सताव्दी,

हुन आजा सैया वे सोह है तनु प्यार दी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।