चोला किस रंगिया

पारंपरिक
श्री राम भजन दुर्गा भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

किसे रंगा रिजा नाल चोला किस रंगियां,

मेरी मैया जी दा चोला किस रंगिया,

चोले दी शान निराली शान है वेखन वाली,

चोला किस रंगिया.....

चोला रंगया ललारी रे राम जी ने हथि कट्या,

होता लाया सीता प्यारी नई,

चोले विच चमकन मोती दूर तक पेंदी ज्योति,

चोला किस रंगिया.....

चोला रंगया ललारी ने गोरा माँ ने लाइयाँ बूटिया,

मोती जड़े त्रिपुरारी ने,

चोले विच सिलम सितारे दूर तक लीक्शा मारे,

चोला किस रंगिया.....

रंग चोले दा लाल दतिये सरिया नु आपो अपनी तनु सब दा ख्याल दतिये,

चोला लवे हुलारे दूर तक अवाजा मारे,

चोला किस रंगिया.....

चोला किस रंगिया.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।