साई तेरी नजर से कही मैं उतर न जाऊ

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॥ पावन पाठ ॥

साई तेरी नजर से कही मैं उतर न जाऊ,

कोई भूल न हो ऐसी तुजसे बिशड न जाऊ,

साई तेरी नजर से कही मैं उतर न जाऊ,

जो राह तू दिखाये उस राह पे चालू मैं,

वो छाव का सफर हो या धुप में जलु मैं,

जिस और तू न भेजे मैं कभी उधर न जाऊ,

साई तेरी नजर से कही मैं उतर न जाऊ,

जिस हाल में भी रखना कभी आह न करेंगे,

वादा किया है तुमसे साई के गुन्हा न करेंगे,

साई अपने वादे से कही मैं मुकर न जाऊ,

साई तेरी नजर से कही मैं उतर न जाऊ,

तेरी रेहमतो के सदके मुझसे निभा रहा है,

बिखरे हुए है हम को तू समेटे जा रहा है,

फिर खा के कोई ठोकर मैं कही बिखर न जाऊ,

साई तेरी नजर से कही मैं उतर न जाऊ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।