आरती बाल कृष्ण की कीजे

पारंपरिक
श्री कृष्ण आरती कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दोहा: जिस घर मे हो आरती, चरण कमल चित लाये,

ताहा हरि वासा करें जोती अनंत जागे |

आरती बाल कृष्ण की कीजे |

अपनों जन्म सफल कर लीजे ||

श्री यशोदा को परम दुलारो |

बाबा की अखियन को तारो |

गोपिन के प्रानन ते प्यारो |

इन पे प्राण नौछावर कीजे ||

बलदाऊ को छोटो भैया |

कनुआ कह कह बोले मैया |

परम मुदित मन लेत बलिया |

यह छवि नैनन मे भर लीजे ||

श्री राधावर सुबर कन्हीया |

ब्रजजन को नवनीत खविया |

देखत ही मन लेत चुरुया |

अपनो सर्वस इन को दीजे ||

तोतरी बोलन मधुर सुहावे |

सखन संग खेलत सुख़ पावे |

सोई सुखति जो इनको ध्यावे |

अब इन को अपनो कर लीजे ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।