भक्त भुलावे भेगा आवो महारी दादी जी

पारंपरिक
अन्य भजन रानी सती दादी भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

भक्त भुलावे भेगा आवो महारी दादी जी,

टाबरे ने कालजे लगाओ म्हारी दादी जी,

बालका ने कालजे लगाओ म्हारी दादी जी,

थासु ही दादी मैं तो आस लगावा,

छोड़ थारो पलो दादी और कहा जावा,

बालका ने मत विशराओ महारी दादी जी,

भक्त भुलावे भेगा आवो महारी दादी जी,

चरना में थारे दादी म्हारो चारो धाम है,

थारे रहते दुनिया से म्हणे क्या काम है,

थे ही म्हारी लाज बचाओ म्हारी दादी जी,

भक्त भुलावे भेगा आवो महारी दादी जी,

सौरव मधुकर तो दादी गुण थारा गावे,

सेवकियाँ माँ थासु अर्ज लगावे,

म्हणे भी झुंझुनू भुलाओ महरी दादी जी,.

भक्त भुलावे भेगा आवो महारी दादी जी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।