जब पहुंचे हनुमत लंका

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

जब पहुंचे हनुमत लंका बजा राम नाम का डंका,

सारे राक्षक गबराये माथा रावण का ढंका ,

मैंने चाद वंद चौदस फेरा लगवाया है ,

फिर कैसे अंदर ये बन्दर घुस आया है,

तहस मेहस कर डाला इसने लंका नगरी,

कहा सो रहे थे सब दरबार के खबरी

ले लांग के कैसे समुन्दर पौंछा लंका के अंदर,

साधारण ये नहीं लगता ये है कोई अध्भुत बन्दर,

मैंने चाद वंद चौदस फेरा लगवाया है ,

फिर कैसे अंदर ये बन्दर घुस आया है,

आ तो गया यह अब जाने ना पाए,

मजा यह आने का पता इसको चल जाये,

इसे ढंड कठोर मिलेगा सुन धरती अगन हिले गा,

जितना देखु गा इसको गुसा बहार निकले गा,

मैंने चाद वंद चौदस फेरा लगवाया है ,

फिर कैसे अंदर ये बन्दर घुस आया है,

भेद अकेले भजरंग ने कुंदन ललकारा,

जो भी सामने आया उसे पटक पटक मारा,

सारे राकशक दर भागे कोई टिका न इसके आगे,

दोनों हाथ जोड़ हनुमत से जीवन की भीख ये मांगे,

मैंने चाद वंद चौदस फेरा लगवाया है ,

फिर कैसे अंदर ये बन्दर घुस आया है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।