भोले नाथ बिना न मुकति मिले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले भोले रट ले जोगनी शिव ही बेडा पार करे,

भोले नाथ बिन न मुकति मिले,

भोले भोले रट ले जोगनी शिव ही बेडा पार करे

उसकी मुकति कभी ना होगी,

यो शिव का न ध्यान धरे,

भोले नाथ बिना न मुकति मिले,

भोले भोले रट ले जोगनी शिव ही बेडा पार करे

किया भस्म जब बस्मा सुर को,

जो बल पे अभिमान करे,

भोले नाथ बिना न मुकति मिले,

भोले भोले रट ले जोगनी शिव ही बेडा पार करे

काम देव करे भंग तपस्या,

उसे जला के राख करे,

भोले नाथ बिना न मुकति मिले,

भोले भोले रट ले जोगनी शिव ही बेडा पार करे

काल भी उसका कुछ न करता,

जो शिव जी का नाम जपे,

भोले नाथ बिना न मुकति मिले,

भोले भोले रट ले जोगनी शिव ही बेडा पार करे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।