लोकी कहन्दे ने झल्ला हो गया

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॥ पावन पाठ ॥

तेरे नाम दा तेरे नाम दा

तेरे नाम दा झोला मैं पा लिया,

लोकी कहन्दे ने झल्ला हो गया,

तेरे प्यार विच होश भुला लिया.

लोकी कहन्दे ने झल्ला हो गया,

छड़ के जहान ओहदा मैं ता झोला ओहदा पा लिया,

मेरे जोगी ने भी मैनु गल नाल ला लिया,

ओह्दी लहर दा हुलारा मैं ता लै लिया,

लोकी कहन्दे ने झल्ला हो गया,

योगी दिया रेहमता न नित मैं ता पौंदा हां,

कलयुग धंदेया तो दूर मैं रहना हां,

सोहनी गुफा नु मैं दिल च सजा लिया,

लोकी कहन्दे ने झल्ला हो गया,

छड़ दिता लोका नु मैं कहन्दे ने जो केहन दे,

नाल जोगी ला ली केवल लगी एह रेहन दे,

झूठी जग तो मैं पला है छुड़ा लिया,

लोकी कहन्दे ने झल्ला हो गया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।