चलो भगतो करलो तयारी मेला

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

चलो भगतो करलो तयारी मेला आ गया पौणाहारी दा,

सोहनी लगदी गुफा प्यारी मेला आ गया पौणाहारी दा,

चेत महीना भगतो खुशियां लेके आया,

भगता प्यारैया नु जोगी ने दर ते भुलाया,

जिस दर दी शोभा न्यारी मेला आ गया पौणाहारी दा,

चलो भगतो करलो तयारी मेला आ गया पौणाहारी दा,

मोटर साईकला उते सोहनियाँ झंडियां ला लो,

कारा बसा टरका नु खूब सजा लो ,

इकठे हो जो सब नर नारी मेला आ गया पौणाहारी दा,

चलो भगतो करलो तयारी मेला आ गया पौणाहारी दा,

सिद्ध जोगी नु रोट दा भोग लगौना,

चरनी शीश झुका के बाबा जी नु मनाना,

मथा टेकना वरो वारि मेला आ गया पौणाहारी दा,

चलो भगतो करलो तयारी मेला आ गया पौणाहारी दा,

टोलिया बन बन इकठे हो के दर ते चलिये,

तारे अपरे वाले दे नाल जा के रलिये

करू किरपा तू दातारि, मेला आ गया पौणाहारी दा,

चलो भगतो करलो तयारी मेला आ गया पौणाहारी दा,

भगतो बोलो जय बाबे दी .

मिल के बोलो जय बाबे दी,

सुमन भी बोले जय बाबे दी .

सनी भी बोले जय बाबे दी .

नवी भी बोले जय बाबे दी .

सारे बोलो बोले जय बाबे दी .

दुनिया बोले जय बाबे दी .

चलो भगतो करलो तयारी मेला आ गया पौणाहारी दा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।