हार तेरा नौलखा मुकट में हीरा कोहिनूर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हार तेरा नौलखा मुकट में हीरा कोहिनूर,

नगीने कुण्डल के हो बाबा बॉम्बे के मशहूर,

ये भागा जयपुर का,

श्याम सोना सोना तुम्हारा ये मुखड़ा,

देख कर लगता है चाँद का है टुकड़ा,

मारे शर्म के तारे सितारे झुकने को मजबूर,

हार तेरा नौलखा मुकट में हीरा कोहिनूर

आज दरबार सजा जैसे कोई जादू से,

छोड़ मंदिर आया ये दूल्हा खाटू से,

लूँ राइ वर्ण नजर लगे गई जरूर,

हार तेरा नौलखा मुकट में हीरा कोहिनूर,

लटकती ऐसे जी गले की हर माला,

शयाम मेरा बैठा हो पहन के वर माला,

ऐसा लगता होगा यह पे शादी का दस्तूर,

हार तेरा नौलखा मुकट में हीरा कोहिनूर

नजारा ऐसे लगे आये दिन फागुन के,

यही दिन वनवारी हो भगतो नाचन के,

नाच नाच कर लूटो लूटो आनंद है भरपूर,

हार तेरा नौलखा मुकट में हीरा कोहिनूर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।