पौणाहारी बाबा तेरे दर ते खड़े पुकार दे

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॥ पावन पाठ ॥

पौणाहारी बाबा तेरे दर ते खड़े पुकार दे,

कुण्डी खोल दे आज नसीबा दी ,

साडी सुनले आज मुरीदा दी असि जन्दे कर्मो हार दे,

पौणाहारी बाबा तेरे दर ते खड़े पुकार दे,

ऐसे कर्मा दे लेख बना दे फकीरी सड़ी झोली पा दे,

जीवन साडा सफल बना दे नजर मेहर दी मार दे,

पौणाहारी बाबा तेरे दर ते खड़े पुकार दे,

तेरे जोगियां होये सवाली वे,

साड़ी दीद दा पलड़ा खाली वे,

तेरी जग दी ज्योत निराली वे,

फड् बाहो भगता तार दे,

पौणाहारी बाबा तेरे दर ते खड़े पुकार दे,

गुण तेरे बाबा गावा गे मुशापुर चौंकी लावा गे,

साड़ी जोगियां आस पुगा दे वे तू जग दे कष्ट निवार दे,

पौणाहारी बाबा तेरे दर ते खड़े पुकार दे,

दुःख समुन्द्रो गहरे वे असि मंदिया तो भी भेहड़े वे,

तेरे भाजो साडा केहड़ा वे बबिता दा वेहड़ा तार दे,

पौणाहारी बाबा तेरे दर ते खड़े पुकार दे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।