भगतो मेला लगाया गुफा ते नवे साल दा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

भगतो मेला लगाया गुफा ते नवे साल दा,

बहेनो मेला लगाया है मेरे सिद्ध नाथ,

बाबा जी दे रोट चडवान दुरो संगता आइए,

चील मिल करदे मंदिर बाबे दे हर पास रुश नाइयाँ ,

पाप लो दर्शन रत्नो दे लाल दा,

भगतो मेला लगाया गुफा ते नवे साल दा,

बाबा जी नु दें वदाहियाँ सारे वरो वारि,

विच गुफा दे बैठा जोगी सब नु जावे तारी,

जोगी देख्या न उस ने कोई नाल दा,

भगतो मेला लगाया गुफा ते नवे साल दा,

इस मेले नु आप सजाया शिव भोले भंडारी,

बालक नाथ नु दिता वरदान सी पुजू दुनिया सारी,

सोनी कहंदा जोगी भगता नु तारदा,

पिंकी कहंदा जोगी भगता नु तारदा,

निकी कहंदा जोगी भगता नु तारदा,

भगतो मेला लगाया गुफा ते नवे साल दा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।