आजा ए भवानी तेरा सेवक तरसै

सौरभ मधुकर
माता दुर्गा भजन रानी सती दादी भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

झिलमिल झिलमिल चूनड़ी में तारा चिमकै

आजा ए भवानी तेरा सेवक तरसै

झिलमिल झिलमिल चूनड़ी में..हो..

लाल सुरंगी मेंहदी थारे हथल्या राचे लाल

धाम है थारो झुंझनू मैया,मंदिर बण्यो विशाल

सिंह पर बैठ्या मइया जी नै सेवक निरखै

आजा ए भवानी तेरा सेवक तरसै

झिलमिल झिलमिल चूनड़ी में..हो..

हाथां सोवै लाल चुड़ो माँ,गल विच नौ सर हार

लाल कसुमल कब्जो सोवै,लंपि की बहार

कानां माहि झुमका माँ के मोती चिमकै

आजा ए भवानी तेरा सेवक तरसै

झिलमिल झिलमिल चूनड़ी में..हो..

माथे सोवै बोरलो,नैना काजल री रेख

पलका तो उघाड़ो मइया टाबरियां नै देख

कबसे खड़्या पुकारा,थारा सेवक बिलखै

आजा ए भवानी तेरा सेवक तरसै

झिलमिल झिलमिल चूनड़ी में..हो..

पग पैजनियाँ कमर तागड़ी

सिर पर चंवर डुले

जगमग थारी ज्योत जगे माँ

छप्पन भोग लगे

देख देख थारो रूप सुहानो मनड़ो हरसै

आजा ए भवानी तेरा सेवक तरसै

झिलमिल झिलमिल चूनड़ी में..हो..

झिलमिल झिलमिल चूनड़ी में तारा चिमकै

आजा ए भवानी तेरा सेवक तरसै

झिलमिल झिलमिल चूनड़ी में..हो..

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।