साड़ी चकती गरीबी बाबा बालक नाथ ने

पारंपरिक
अन्य भजन बाबा बालक नाथ भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

छड़ी थोड़ न कोई भर ते भण्डार नाथ ने,

साड़ी चकती गरीबी बाबा बालक नाथ ने,

असि नंग लोका दे पीछे था था नक रगड़ोंदे रहे,

खैर किसे न पाई सी आसी रो रो दुःख सुनान्दे रहे,

सादे हंजू आके पुहंजे लोको आप नाथ ने,

साड़ी चकती गरीबी बाबा बालक नाथ ने,

आज गाड़ियां दे विच घूमदे है एह किरपा है सब बाबे दी,

हर साह नाल लाइये नाम उसदा ओह रेह्न्दा नाल साडे जी,

गुड़ी अम्बर चढाई साड़ी आप नाथ ने,

साड़ी चकती गरीबी बाबा बालक नाथ ने,

रिधिया सिधिया दा मालिक है ओह्दी नब्ज कोई न जान दा है,

सोनी पटी दा कहंदा है जो मन दा मौजा मन दा है ,

एथे स्वर्ग दिखाया साहनु आप नाथ ने,

साड़ी चकती गरीबी बाबा बालक नाथ ने,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।