रात नवे साल दी

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॥ पावन पाठ ॥

दीवे भी जगौने ते पटके भी वजोने आ,

ढोल ते ढगे दे उते भंगड़े भी पाउने आ,

कर नी है इंज शुरवात नवे साल दी,

बाबा जी दी गुफा ते मनाउनि भगतो असि रात नवे साल दी,

तेरे नाल ही मनौनि जोगियां असि रात नवे साल दी,

बेतिया भी साल ओ भी चेते बड़ा आउगा,

नवा साल नवियाँ ही खुशिया दिखाऊ गा,

आजो सारे ले जो डॉट नावे साल दी,

बाबा जी दी गुफा ते मनाउनि भगतो असि रात नवे साल दी,

तेरे नाल ही मनौनि जोगियां असि रात नवे साल दी,

दूर बाबा करे रात गम दिया कालियाँ,

ताहियो ही मनाउंदे ेथे भगत दिवालियां,

कर्मा नाल मिले एह सुगात नवे साल दी,

बाबा जी दी गुफा ते मनाउनि भगतो असि रात नवे साल दी,

तेरे नाल ही मनौनि जोगियां असि रात नवे साल दी,

नवियाँ ही भेटा विच नवा रस होयेगा,

सूखा राहो वाला मोती एहो जाहे प्रोये गा,

करू गा ओ नवी गल बात नवे साल दी,

बाबा जी दी गुफा ते मनाउनि भगतो असि रात नवे साल दी,

तेरे नाल ही मनौनि जोगियां असि रात नवे साल दी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।