नावा साल मनोना नाल तेरे

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॥ पावन पाठ ॥

ढोल वज दे जोगियां दर तेरे,

पेंदा भंगड़ा बाबा जी दर तेरे,

ढोल भज दे जोगियां दर तेरे,

जैकारे लगदे बाबा जी दर तेरे,

नावा साल मनोना नाल तेरे,

किरपा जोगी दी परिवार आया है तेरे दरबार,

देवी चरना दा तू प्यार अरुण राय तेरा लाल,

अरुण रये तेरा लाल करदे पार वेहड़े,

ढोल भज दे जोगियां दर तेरे....

कोई पुजदा मंदिर मस्जिद कोई पुजदा काबा,

मैं तनु रब मन्या लोक आखदे बाबा,

तेरे दर ते रोट चढ़ाये तुसा ने साढे कम चलाये,

असा ने बड़े नोट कमाए तेरे नाम दे लंगर लाये,

सोहनी पटी वाला गाये पूजे श्याम सवेरे,

ढोल भज दे जोगियां दर तेरे......

दर तेरे न चढ़ के जोगियां होर किते नहीं जाना,

जिह्ना चिर साह चलदे तेरा ही नाम धियोना,

जिह्ना चिर साह चलदे ऐसी तेरे ही दर ते ओना,

संगता दुरो दुरो ाईयाँ जोगियां तनु देन वदाईयाँ,

होइयाँ सब पास रुस्वाइयाँ भेटा सौरव ने है गाइयाँ,

लाये दर ते डेरे,

ढोल भज दे जोगियां दर तेरे,

भरियाँ सरावा संगता नाल रोका रत्नो वेहड़े,

गुफा विच रेहन वलियाँ ऐसी उड़ दे आसरे तेरे,

ढोल भज दे जोगियां दर तेरे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।