माता दे दर ते ने मिलदे सुख हज़ारा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माता दे दर ते ने मिलदे सुख हज़ारा,

मा दे चरना च मिलदे सुख हज़ारा,

कोई आके देख लवो मैं दर ते खड़ा पुकारा,

माता दे दर ते ने मिलदे सुख हज़ारा,

वखरा है दर एहदा वखारा सुभा है,

पला विच कर दिन्दी पुरे सरे चाह है,

कोई आके कर लवो पुरे कर लवो मैं खड़ा अवाजा मारा,

माता दे दर ते ने मिलदे सुख हज़ारा,

एह्दे दर उते ना कोई तंगियां उदासियाँ,

हर वेले बुला उते रेहन सदा हसियां,

दुःख न कोई नेड़े आवन्डा,

सदा खिड़ियाँ रेहन बहारा,

माता दे दर ते ने मिलदे सुख हज़ारा,

जो चाहे मंग लो खाली नहीं मोड़ दी,

भली जहे निमाने दा दिल नहीं तोड़ दी,

कदे न भुलावा उस नु मैं तन मन उस तो वारा,

माता दे दर ते ने मिलदे सुख हज़ारा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।