मरघट वाले है ओ बाबा मरघट वाले है

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

ओ मेहंदीपुर से आकर बाबा,

सालसर से आकर बाबा ,

बन गये दिल्ली वाले है,

मरघट वाले है ओ बाबा मरघट वाले है,

लाल लंगोटा हाथ में घोटा देव बड़े दिल वाले है,

भगतो की ये रक्षा करते बाबा मरघट वाले है,

उनको यहाँ से कुछ मिलता यो भी दिल के काले है,

मरघट वाले है ओ बाबा मरघट वाले है,

जैसी तेरी ईशा प्यारे वैसे भोग लगा देना,

मन चाहा फिर बाला जी से आकर वर तू पा लेना,

उतना मीठा मिल जायेगा जितना मीठा डाले है,

मरघट वाले है ओ बाबा मरघट वाले है,

मैंने जब भी माँगा इनसे पल में ही दे डाला है,

मित्तल को तो सारी उम्र ही बाला जी ने पाला है,

दिल्ली में रह कर के बाबा बन गये दिल्ली वाले है,

मरघट वाले है ओ बाबा मरघट वाले है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।