भोले दानी बाबा भोले दानी

लखबीर सिंह लक्खा
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

लाखो दानी देखि लेकिन तेरी अलग कहानी,

भोले दानी जय हो भोले दानी,

बाबा भोले दानी...

तुमने कोई नहीं की शंका,

ओ हस्के रावण को दे डाली लंका,

चुरा ले गया सपने रावण बैठी रही भवानी,

बाबा भोले दानी.....

तेरा पार ना कोई पाया,

तूने अध्भुत रूप बनाया,

है भुजंग भूशण आभूषण,

सिर गंगा महारानी,बाबा भोले दानी...

जिनको त्रिभुवन ने ठुकराया,

उनको तुम ने है अपनाया,

अपनालो हम को भी बेधड़क है लखा अज्ञानी ,

बाबा भोले दानी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।