कावां वे कावां तेंनु कूट कूट चुरिया पावा

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कावां वे कावां तेंनु कूट कूट चुरिया पावा,

के अज माई आवे गी के ना,

कावां वे कावां तेंनु कूट कूट चुरिया पावा,

बार बार बने उते का पेया बेह्न्दा है,

आएगी माँ झंदेवाली दिल मेरा कहंदा है,

कावां वे कावां तेंनु कूट कूट चुरिया पावा

अजाई जरुर हूँ होर कर देर न,

हसे न ज़माना एह भी कर देवी न देर माँ,

ताहनेया दे तीर विच दिल मेरा सह्न्दा है,

बार बार बने उते का पेया बेह्न्दा है,

कावां वे कावां तेंनु कूट कूट चुरिया पावा

यादा ते उडीका दिया मूक गईयाँ घड़ियाँ,

तेरे नाम वालियां खुमारियां ने चादीयाँ,

ला देयो उलाम्बा हूँ उलामबा एहो रहंदा है,

बार बार बने उते का पेया बेह्न्दा है,

ठंडियाँ हवावा विच आंदा सन्देश है,

कालियां घटावा विच माँ दा परवेश है,

पथरा च माँ तेरा माँ भुलेखा मैं मेनू पेंदा है,

बार बार बने उते का पेया बेह्न्दा है,

सुन के पुकार वाल बचियाँ दे आवे तू,

दर्शी निमानिये दी लाज बचावे तू,

दर्द विशोडा माये याद कर लेनदा है,

बार बार बने उते का पेया बेह्न्दा है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।