तूने इतना दिया की हद कर दी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हद कर दी हर कर दी,

तूने इतना दिया की हद कर दी ,

मैंने इतना लिया की हद कर दी,

आज अब इक और तमना है,

तेरा सन्मुख दर्शन करना है,

अप्रम पार हुआ पाया तेरा पार नही कभी भी सवाली को किया इनकार नही,

छूके तूने मिटी को सोना कर डाला अधना भिखारी को रत्नों में भर डाला,

मैंने इतना पुकारा के हद कर दी,

तूने इसा मुझे तारा के हद कर दी,

दया करी श्रष्टि में तूने जब देखा माँ,

पल में बदल गई भाग की रेखा माँ,

अध्यारे जीवन में तेरी जब ज्योत जगी,

कुटियाँ महल बनी जरा भी न देर लगी,

मैंने मांग मांग के हद कर दी,

तूने बाँट बाँट के हद कर दी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।