कहाँ जाके फरियाद करू

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॥ पावन पाठ ॥

कहाँ जाके फरियाद करू,

तू ही मेरा ठिकाना है,

तू ही है माझी तू ही किनारा,

तू ही भवर है तू है द्वारा,

चाहे डुबोदे चाहे बचा ले,

कर दिया खुद को तेरे हवाले,

क्यों फ़िक्र बेकार करू,

मुझे किसने बचाना है,

तू ही मेरा ठिकाना है,

तुझपे भरोसा तुझपे यकीन है,

मेरा तो कोई और नहीं है,

दुःख न देना सुनले अर्जी तेरी रजा है तेरी मर्जी,

हर सेह स्वीकार करो,

तुझे सब कुछ माना है ,

तू ही मेरा ठिकाना है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।