भगत थारी चुनड़ ल्याया ए

सौरभ मधुकर
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ओढ़ो ओढ़ो म्हारी माता रानी आज

भगत थारी चुनड़ ल्याया ए

ओढ़ो ओढ़ो म्हारी कुलदेवी आज

भगत थारी चुनड़ ल्याया ए

इ चुनड़ को पोत है मइया जयपुर से मंगवायो

भगतां कै घर बनी चुनड़ी,सांचो माल लगायो

प्यारो लागे चटक रंग लाल

भगत थारी चुनड़ ल्याया ए

सोने चांदी का तार कढ़ाकर लंपि नै जड़वाई

साँचे मोत्या री लड़ियाँ नै चारु मेर लगाई

बीच तारा री सजी रे बारात

भगत थारी चुनड़ ल्याया ए

ओढ़ चुनड़ी बैठी मइया,कितनी प्यारी लागे

तीन लोक में मइया थारी शक्ति का डंका बाजे

रया देव फूल बरसाय

भगत थारी चुनड़ ल्याया ए

म्हारी मइया जी कै भगतो नजर नही लग जावै

लूड़ राई मिल कर वारो जद हीबड़ो सुख पावे

जावै राम बलिहारी आज

भगत थारी चुनड़ ल्याया ए

ओढ़ो ओढ़ो म्हारी माता रानी आज

भगत थारी चुनड़ ल्याया ए

ओढ़ो ओढ़ो म्हारी कुलदेवी आज

भगत थारी चुनड़ ल्याया ए

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।