सत्य बोल नित प्राणी

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॥ पावन पाठ ॥

सत्य बोल नित प्राणी सत्ये निष्ठ बन प्राणी

सत्ये ही परमेश्वर है सतय ही सुख है,

सत्ये ही जीवन है प्राणी झूठ में दुःख है,

सत्य बोल नित प्राणी सत्ये निष्ठ बन प्राणी

सत्य की महिमा अप्रम पार है करने सत्य का पालन,

अर्थ धर्म और काम मोक्ष मिले चारो पदार्थ पवन,

हरी ॐ हरी ॐ,

सत्य के मार्ग नहीं जो चलते ईश्वर उनसे विमुख है,

सत्य बोल नित प्राणी सत्ये निष्ठ बन प्राणी

सत्य से बढ़कर न कुछ जग में देवता न दूजा,

मन वाणी कर्म से अपने करके सत्ये की पूजा ,

हरी ॐ हरी ॐ,

आवाहन कर सत्ये देव का नारायण सन्मुख है,

सत्य बोल नित प्राणी सत्ये निष्ठ बन प्राणी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।