उड़ूँ आसमान में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

उड़ूँ आसमान में माँ बन के पतंग तेरी,

छोड़ न देना कही डोर तू मेरी,

मिला है सहारा मुझे मैया तेरे प्यार का,

सब कुछ पाया मैंने सुख संसार का,

बरसती रहे मुझपर रेहमत तेरी,

छोड़ न देना कही डोर तू मेरी,

उड़ूँ आसमान में ...

तेरे चरणों की धूल माथे से लगाई माँ,

तेरे नाम की है मन में ज्योत जगाई माँ,

चाहे कुछ भी हो जाए ज्योत न भुजे मेरी,

छोड़ न देना मैया डोर तू मेरी,

उड़ूँ आसमान में ......

गमो की बुरी नजरो से बचाये रखना,

छूट ना जाऊ कही मुझे थामे रखना,

दास अजीत को जरूरत है तेरी ,

छोड़ न देना मैया डोर तू मेरी,

उड़ूँ आसमान में ......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।