झूमो नाचो गाओ सारे खुशिया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

झूमो नाचो गाओ सारे खुशिया मनाओ ये घडी फिर न मिले गी,

दूर खड़े तुम न सोचो शर्म छोड़ो आके नाचो तेरे भिग्न दूर माँ करे गी,

आरे बोलो बोलो बोलो रे जय दुर्गा माँ,

चार दिनों की है ज़िंदगी कुछ पल तो बाते साथ बिता ले,

यहाँ वहा क्यों बंदे भटके रे माँ को तू अपने मन में फसा ले,

दिल से बोलो जय कारे होंगे तेरे वारे न्यारे,

ये घडी फिर न मिले गी,

दूर खड़े तुम न सोचो शर्म छोड़ो आके नाचो तेरे भिग्न दूर माँ करे गी,

आरे बोलो बोलो बोलो रे जय दुर्गा माँ,

करे जो नवरात्रो में आराधना उसकी पूर्ण हो हर कामना,

किरपा बरस रही माँ की चहु और,

आई है तेरी बारी मुँह न खोल,

मस्ती में झूम ले तू भक्ति में नाच ले तू आत्मा अजीत किसने की,

दूर खड़े तुम न सोचो शर्म छोड़ो आके नाचो तेरे भिग्न दूर माँ करे गी,

आरे बोलो बोलो बोलो रे जय दुर्गा माँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।