साई मौला मेरे साई मौला

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॥ पावन पाठ ॥

तुझे ही पाने की हसरत लिए मैं आया हु,

दीवाना हो गया दीदार तेरा पाकर के,

साई मौला मेरे साई मौला मेरे,

मेरी इस ज़िंदगी में तू है समाया है ऐसे,

धड़कनो के लिए हो सांसे जरुरी जैसे,

तेरे ही नाम मदहोश हुआ जाता हु,

तेरा हु मैं तो बता तुजसे हु जुदा कैसे,

तेरा कर्म है जो मैं फिर से मुस्कुराया हु,

दीवाना हो गया दीदार तेरा पा कर के,

साई मौला मेरे साई मौला मेरे,

गमो के स्द्मो से जब कोई आँखे है रोती,

सुना है उसपे तेरे रहमो की बारिश होती,

जो भी दुनिया में कही पर भी ठोकरे खाता उसके पल पल की खबर साई तुझको होती,

बड़ी उल्जन के संग तेरे दर पे तेरा आया हु,

दीवाना हो गया दीदार तेरा पा कर के,

साई मौला मेरे साई मौला मेरे,

तेरी शिरडी का साई लुफ्त साई ऐसा मैंने लिया,

जैसे जन्नत की सैर जीत जी है मैंने किया,

गया भूल ज़माने की सारे जख्मो को गैर तो गैर अपने ने सितम मुझपे किया,

तेरे ही सजके मैं चौकठ पे तेरी आया हु,

दीवाना हो गया दीदार तेरा पा कर के,

साई मौला मेरे साई मौला मेरे,

तेरे दीवाने की हर और छाई मस्ती है,

सरे बाजार कहे साई मेरी हस्ती है,

कोई साहिल पे बैठा उस को डराये गा,

लड़े तूफ़ान से जो साई ही उसकी कश्ती है,

भिखर के सिमटा तो मैं तुझे कहने आया हु,

दीवाना हो गया दीदार तेरा प् कर के,

साई मौला मेरे साई मौला मेरे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।