तुम प्राथना करो

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॥ पावन पाठ ॥

जब जब ये मन घबराये तुम प्राथना करो,

जब राह नजर ना आये तुम प्राथना करो,

चारो तरफ अँधियारा छाये गोरी उदासी मन फ़रयाये,

अगर मुश्किल हो जाए तुम प्राथना करो,

जब जब ये मन घबराये तुम प्राथना करो,

जग में अकेला खुद को पाये,

कोई न तेरा साथ निभाये,

तब प्रभु जी के पास में आउ तुम प्राथना करो,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।