तेरा दर तो बिहारी जी दुखियों का सहारा है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरा दर तो बिहारी जी,

दुखियों का सहारा है,

तेरे दर के ही टुकडो पर,

तेरे दर के ही टुकडो पर,

हम सबका गुजारा है,

तेरा दर तों बिहारी जी,

दुखियों का सहारा है,

टूटी हुई कश्ती है,

और दूर किनारा है,

टूटी हुई कश्ती है,

और दूर किनारा है,

अब पार करो नैया,

अब पार करो नैया,

हमें तेरा सहारा है,

तेरा दर तों बिहारी जी,

दुखियों का सहारा है...

बिगड़ी हुई तकदीरे,

तेरे द्वार पे बनती है,

बिगड़ी हुई तकदीरे,

तेरे द्वार पे बनती है,

और कोई नही अपना,

और कोई नही अपना,

अब तू तो हमारा है,

तेरा दर तों बिहारी जी,

दुखियों का सहारा है...

जब भक्त बुलाते है,

दौड़े चले आते हो,

जब भक्त बुलाते है,

दौड़े चले आते हो,

अब जाओ भगवन,

अब जाओ भगवन,

हम सबने पुकारा है,

तेरा दर तों बिहारी जी,

दुखियों का सहारा है......

आखिर मैं तेरे दर से,

जाये तो कहाँ जाये,

आखिर में तेरे दर से,

जाये तो कहाँ जाये,

तेरे द्वार बिहारी जी,

तेरे द्वार बिहारी जी,

जन्नत का नज़ारा है,

तेरा दर तों बिहारी जी,

दुखियों का सहारा है.....

तेरा दर तो बिहारी जी,

दुखियों का सहारा है,

तेरे दर के ही टुकडो पर,

तेरे दर के ही टुकडो पर,

हम सबका गुजारा है,

तेरा दर तों बिहारी जी,

दुखियों का सहारा है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।