मैया जागे विच आई है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मौसम भी होया बड़ा ही रूहानी बदला च चमक्दी तार आसमानी है,

पेंडिया फुहारा ठंडी हवा भी चलाई है,

देखो देखो मैया जागे विच आई है,

शेर ते सवार होक मैया जागे विच आई है,

करलो दीदार मैया जागे विच आई है,

श्रद्धा नाल आजो मैया थोड़ कोई न रखदी,

कण कण विच देखो मैया मेरी वसदी,

माँ न ध्या के वेखो ज्योत भी जगाई है,

देखो देखो मैया जागे विच आई है,

शेर ते सवार होक मैया जागे विच आई है,

राजा एते राणा एथे हर कोई झुक्दा कष्ट कलेश,

एथे पला विच मुकदा किती जिहने सेवा ओहने ज़िंदगी बनाई है,

देखो देखो मैया जागे विच आई है,

शेर ते सवार होक मैया जागे विच आई है,

कटवी पिंड दा माँ रखदी ख्याल है चरना दी धूल तेरा प्रीत अटवाल है,

मलवे ने किनी सोहनी भेट भी सुनाई है,

देखो देखो मैया जागे विच आई है,

शेर ते सवार होक मैया जागे विच आई है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।