ना जाने किसे वैरी ने माहरे पितर भांध दिए बाबा

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

ना जाने किसे वैरी ने माहरे पितर भांध दिए बाबा,

करा काम किसे ने खोट्या हमने दुःख हो रहा मोटा,

हमारे दो पितर से बाबा इन्हे दोनुया का गल घोटा,

हर उठा के हाथ में सोटा तू कर इन्साफ दिए बाबा,

ना जाने किसे वैरी ने माहरे पितर भांध दिए बाबा,

कोई जुल्मी जुलम कमा गया पितर के बंध लगा गया,

मैं बहुत घना तंग पा गया मैं फिरू सु भागा भागा,

भंधन भीतर के काटो तू कर इन रूल बाबा,

ना जाने किसे वैरी ने माहरे पितर भांध दिए बाबा,

थोड़ी दया करो बजरंगी म्हारी हर्लो ये तंगी,

कोई चल गया चाल बेढंगी माहरी हुलिया होइ बे रंगी,

महारा हॉवे जीवे अखाड़ा तू कर इन्साफ दिए बाबा,

ना जाने किसे वैरी ने माहरे पितर भांध दिए बाबा,

मुझे विजय भक्त ने कह दी म्हणे तेरी अर्ज लगा दी,

पल भर में मेहर जता दी माहरी साड़ी पीढ़ मिटा दी,

महारे पितर के बंध कांटे तनहे गये निरोल बाबा,

ना जाने किसे वैरी ने माहरे पितर भांध दिए बाबा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।