कंजका दी पूजा करदे ने

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जग ते तेरा सिर नामा लोका दी गल सुनावा ,

तनु ऊलाम्बा देके सबना दे खाने पावा,

ना लोकि हूँ धियाँ नु मारन तो डरदे दे,

तेरे नाम ते क्यों कंजका दी पूजा करदे ने,

कुख जीती नु मार के लोकी कंजका घरे बिठाने दे माँ,

रख नवराते तेरे माँ रुसी नु तनु मनाओंदे माँ,

धिया विच रब वसदा है जीहदे नाल जग हसदा है,

क्यों लोका दियां अकला उते पे गये पर्दे ने,

तेरे नाम ते क्यों कंजका दी पूजा करदे ने,

तनु तरस नहीं आंदा माँ तेरे सामने धी नु मरण माँ,

जेहड़े लोकी पाप ने करदे की ओह जग नु तारण माँ,

दुनिया लालच पैसे दी पैसा है मैल हथा दी,

पैसे करके क्यों लोकी एहने जुलम करदे ने,

तेरे नाम ते क्यों कंजका दी पूजा करदे ने,

रब लोक ने जो धिया नु चूक ले जांदे सड़का तो,

माँ चरना विच था देवे ओह सिंहदे जान स्वर्ग नु,

आखे गम दूर एह जग दा धियाँ ता रूप ने रब दा,

जिस घर विच धिया दे भुटे छा करदे ने,

तेरे नाम ते क्यों कंजका दी पूजा करदे ने,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।