ओ माँ हमे अपने चरणों से लगा

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॥ पावन पाठ ॥

जिस दिन से आये तेरे शरण खुशियों से महका ये जीवन,

जन्मो जन्म तेरे है हम अब तू ही हमे सम्बाले,

ओ माँ हमे अपने चरणों से लगा ले हम को अपना बना ले,

हम को चरणों से लगा ले,

हम को तेरा ही सहारा साथ तेरा लागे प्यारा,

हर पल जपु तेरा नाम,

रोम रोम मेरा गाये मैया तेरा नाम गाये भये मुझे कुछ और न,

करता रहु तेरा दर्शन तेरे नाम का कर सुमिरन,

जन्मो जन्म तेरे है हम अब तू ही हमे सम्बाले

ओ माँ हमे अपने चरणों से लगा ले हम को अपना बना ले

मुझको विश्वाश है पा मेरे आस पास है माँ,

मुझसे है दूर तू नहीं,

जब भी मेरा मन गबराये सिर पे मेरे हाथ फिराए,

माँ है वसी हर कही,

तेरे चरणों में अर्पण अंकुश का जीवन जन्मो जन्मो तेरे है हम

अब तू ही हमे सम्बाले,

ओ माँ हमे अपने चरणों से लगा ले हम को अपना बना ले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।