सती मात विराजे रे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

झालर संख नगाडा भाजे रे झुंझनू के मंदिर में सती मात विराजे रे,

सती मात विराजे रे महारी दादी विराजे रे,

भारत राजस्थान में जी झुंझार एक धाम,

सूरज शामी बना देवरो दादी जो अस्थान,

थे लाल ध्वजा लहरावे से,

झुंझनू के मंदिर में सती मात विराजे रे

दादी अमावश भरे है मेलो भीड़ लगे आती भरी,

नर नारी थारा दर्शन करने आवे भारी भारी,

थारे जात झडूला लागे रे,

झुंझनू के मंदिर में सती मात विराजे रे

झुँझन वाली रानी सती को धरो हमेशा ध्यान,

भेटा टाबरियां तासु मानगा भक्ति को वरदान,

दादी अटको काम बनावे रे,

झुंझनू के मंदिर में सती मात विराजे रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।