साई इक बारी आ जाओ इस अनाथ के लिए

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॥ पावन पाठ ॥

कितना रोया दास गणु साईनाथ के लिए,

साई इक बारी आ जाओ इस अनाथ के लिए,

कितना रोया दास गणु साईनाथ के लिए,

साई दर्शन दिखला दो भक्तो के भाग जगा दो,

साई के नाम पे रोया साई के धाम पे रोया,

साई तेरे चरणों को अपने आंसू से धोया,

मैं कुछ भी कर दूंगा तेरे साथ के लिए,

साई इक बारी आ जाओ इस अनाथ के लिए,

तुम ही हो मेरे साई तुम ही हो मेरे देवा,

साई दिन रात करू मैं तेरे चरणों की सेवा,

मेरा सारा जीवन योगी राज के लिए,

साई इक बारी आ जाओ इस अनाथ के लिए,

छोड़ कर दोनों हाथो तेरे दरबार में रोया,

याद कर तुझको साई घनु हर बार है रोया,

प्यासी उसकी आँखे दर्श की आस के लिए,

साई इक बारी आ जाओ इस अनाथ के लिए,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।