आई शिवरात्रि ते शिव दा विवहा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आई शिवरात्रि ते शिव दा विवहा,

नच नच भगत धमाला रहे पा,

चढ़या है सारिया नु गोड़े गोड़े चा,

नच नच भगत धमाला रहे पा,

कण विच भीशुए गल विच फनियर,

जटा च गंगा बेहंदी,

मस्तक चंदा सोहना लगदा मात गोरजा केहन्दी,

जचदे ने पुरे रहे नंदी उते आ,

नच नच भगत धमाला रहे पा,

आई शिवरात्रि ते शिव दा विवहा,

शुक्र शनिशर पौंदे भरथु रल के भूत चढ़ेला,

राहु केतु पौन बोलियां पौंदे पये ने पेहला,

चक देने पव देनी धरती हला,

नच नच भगत धमाला रहे पा,

आई शिवरात्रि ते शिव दा विवहा,

जग मग जगदी श्रिष्टि रूप इलाही चढ़या,

सारा जग पेया खुशिया मनोदा हाथ गोरा शिव फड़्या,

लिख्दा समीर मणि गुण रहा गा,

नच नच भगत धमाला रहे पा,

आई शिवरात्रि ते शिव दा विवहा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।