कुंभ की महिमा जान ले

पारंपरिक
माँ गंगा भजन विविध भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

कुंभ की महिमा जान ले,

धूल जायेगे पाप तेरे,

कुंभ की महिमा जान ले,

कुंभ मेले में जो भी आया उसने जीवन अमृत पाया,

कुंभ मेले में नहा कर कर ले तू अपना उधार,

गंगा यमुना सरसवती है संगम है प्राग,

कुंभ की महिमा जान ले,

कुंभ का मेला है सुख दाई इसकी महिमा पुराणों में पाई,

इस अवसर को जाने दिया तो पश्ताये गा सदा,

देर न तू कर आने में इक पल भी न गवा ओ बंदे,

कुंभ की महिमा जान ले,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।