यार दी दीवानी सरकार दी दीवानी

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॥ पावन पाठ ॥

यार दी दीवानी सरकार दी दीवानी,

मैं कोजी मेरे काम भी कोजे करा नवाज न रखड़ी रोजे,

मैं रंग मुरशद दे रंगी गई जींद यार दे रंग विच रंगी गई,

यार दी दीवानी सरकार दी दीवानी,

चंदरे जग तो मैं की लेना,

कुझ न कुझ कहन्दे रेह्न्दा,

चिद्दि उड़ गई मालोका तो,

ओहना यारी की लानी जेहड़े डर दे ने लोका तो,

चंदरे जग तो मैं की लेना,

कुझ न कुझ कहन्दे रेह्न्दा,

सुहला ते भी तुरना पैना,

मैं की खत लउ गई जे संगी गई,

यार दी दीवानी सरकार दी दीवानी,

लाल अठोली टूटू न जावे दुनिया मेरी लूट न जावे,

चीते रंग दा पणाम हो सी ओ सोहनिया,

जुंडिया मैं न कर मोया मिटटी भी गुलाम हो सी,

लाल अठोली टूटू न जावे दुनिया मेरी लूट न जावे,

साथ साजन दा छूट न जावे,

मैं बिना वचोलियो मंगी गई,

जींद यार दे रंग विच रंगी गई,

यार दी दीवानी सरकार दी दीवानी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।