पूछना सी कइने नकोदर नू

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॥ पावन पाठ ॥

जीवे मस्ती बंदी मस्ता दी,

जे मोरा मस्त लगोंदे ना,

पूछना सी कइने नकोदर नू ये लड़ी साई आउंदे न

जेहड़े दिन तो विच नकोदर मस्ता ने कदम टिकाया है,

हर्ष फर्श ते इस शहर दा मस्ता ने नाम चमकाया है,

कोई झुक्दा न इस दर उते जे जे जलवे मस्त दिखाउंदे ना,

पूछना सी कइने नकोदर नू ये लड़ी साई आउंदे न

बाबा शेरशाह बापू लाल बादशाह एथे रज के किरत पगाया है,

मिलान वास्ते ेहना मस्ता नू खुद रब धरती ते आया है,

फिर जन्नत जाहे नकोदर तो लोकि रब दे दर्शन पौंदे ना,

पूछना सी कइने नकोदर नू ये लड़ी साई आउंदे न

साई लाड्डी शाह ने मुराद शाह जी नाल ऐसी लाइ यारी है,

दुनिया केहन्दी ओ है शहंशा दसदे सेवादारी है,

रंग मेजर सेवा दारी दे सैयां बिन किसे न आउंदे ना,

पूछना सी कइने नकोदर नू ये लड़ी साई आउंदे न

साई लाड्डी शाह ने मरजाने ते ऐसा कर्म कमाया है,

मस्ता ने मस्त बना दिता है जदो कदम दे नाल लाया है,

मुकेश इनायत रंग मस्ता दे हर इक दी समज च आउंदे ना,

पूछना सी कइने नकोदर नू ये लड़ी साई आउंदे न

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।