जान कढ़ लई आ बेईमान

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॥ पावन पाठ ॥

जान कढ़ लई आ बेईमान जान वाली गल कर के,

खबरे क्यों दर लगदा ना रह जावा दिल फड़ के,

जान कढ़ लई आ बेईमान

तेरे भाजो इक पल भी गुजारना मुहाल ए,

सुनिया करदा विशोडा बुरा हाल एह,

मैं कलिया नि रह सकना,

एह सोच सोच दिल धड़के,

जान कढ़ लई आ बेईमान...

अच्छा फिर जा सजना छेटी मूड आवि वे,

याद रखी साहनु साड़ी याद न भुलाई वे,

तू जिहनि देर वख रहना झुना असा मर मर के,

जान कढ़ लई आ बेईमान

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।