मैनु हिचकी आ रही है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मन लग दा नही किते टिकदा नही,

मन टिकदा नही किते लग दा नही,

ओहनू मेरी याद आ रही है,

मेनू हिचक ते हिचकी आ रही है,

सुपने विच मेरे माँ आई कह्द्नी लाल तू क्यों नही आया,

हाले मेरे तक पुत्र तू अपना टिकेट बुक नही करवाया,

इथे वेटिंग वध दी जा रही है,

मेनू हिचक ते हिचकी आ रही है,

तेरी किरपा माँ मेरी मेनू कम बड़े सी सारे,

जीवे ही वेहला होया दातिये भज्या तेरे द्वारे,

क्यों ताहने मारी जा रही है,

मेनू हिचक ते हिचकी आ रही है,

दुनिया कहन्दी चला सानु लाइ जन्दा फेरा,

मुड के अपने घर न जावा वस् चले जे मेरा,

मेरी बोहटी फ़ोन घुमा रही है गल्ला बचिया न करवाई रही है,

मेनू हिचक ते हिचकी आ रही है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।