गोपाल मेरी नैया क्यों डगमगा रही है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

गोपाल मेरी नैया क्यों डगमगा रही है,

आजा रे अब तो आजा तेरी याद आ रही है,

गोपाल मेरी नैया क्यों डगमगा रही है,

तूफ़ान से लड़ते लड़ते कही डूभ ही ना जाए,

विश्वाश श्याम मेरा अब टूट ही न जाए,

विकराल काली लेहरे मुझको डरा रही है,

गोपाल मेरी नैया क्यों डगमगा रही है,

मतलब के इस जहां में कोई नहीं हमारा,

किस को भला पुकारे किसका मिले सहारा,

बेबस मेरी ये सांसे तुम को भुला रही है,

गोपाल मेरी नैया क्यों डगमगा रही है,

दुनिया का सँवारे क्यों अंदाज है निराला,

प्रेमी को पीना पड़ता हर दम ज़हर का प्याला,

हारे हुए को मोहन दुनिया सत्ता रही है,

गोपाल मेरी नैया क्यों डगमगा रही है,

दरमो दार तुम पर छोड़ो या अब समबालो,

कहता शिवम् ओ सँवारे चरणों से अब लगा लो,

धड़कन तेरे तरुण की तेरा नाम गा रही है,

गोपाल मेरी नैया क्यों डगमगा रही है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।